रविवार, 13 सितंबर 2015

एक युवक बगीचे में बहुत गुस्से में बैठा था पास ही एक बुजुर्ग बैठे थे
उन्होने उस परेशान युवक से पूछा :- क्या हुआ बेटा क्यूं इतना परेशान हो
युवक ने गुस्से में अपनी पत्नी की गल्तीयों के बारे में बताया
बुजुर्ग ने मंद मंद मुस्कराते हुए युवक से पूछा बेटा क्या तुम बता सकते हो तुम्हारा धोबी कॊन है ?
युवक ने हैरानी से
पूछा :- क्या मतलब ?
बुजुर्ग ने कहा :- तुम्हारे मैले कपडे कॊन घोता है
युवक बोला :- मेरी पत्नी
बुजुर्ग ने पूछा :- तुम्हारा बावर्ची कॊन है
युवक :- मेरी पत्नी
बुजुर्ग :- तुम्हारे घर ऒर परिवार, सामान का ध्यान कॊन रखता है
युवक :- मेरी पत्नी
बुजुर्ग ने फिर पूछा :- कोई मेहमान आए तो उनका ध्यान कॊन रखता है
युवक :- मेरी पत्नी
बुजुर्ग :- परेशानी ऒर गम में कॊन साथ देता है ,
युवक :- मेरी पत्नी
बुजुर्ग :- अपने माता पिता का घर छोड़ कर जिंदगी भर के लिए तुम्हारे साथ कॊन आता है
युवक :- मेरी पत्नी
बुजुर्ग :- बीमारी में तुम्हारा ध्यान ऒर सेवा कॊन करता है
युवक :- मेरी पत्नी
बुजुर्ग बोले :- एक बात ऒर बताओ तुम्हारी पत्नी इतना काम ऒर सबका ध्यान रखती है क्या कभी उसने तुमसे इस बात के पैसे लिए
युवक :- कभी नहीं
इस बात पर बुजुर्ग बोले कि पत्नी की एक कमी तुम्हें नजर आ गई मगर उसकी इतनी सारी खुबियां तुम्हें कभी नजर नही आई


भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
मो. 0917891529862

जानिए कैसे ख़त्म हुए हमारे गुरुकुल

जानिए कैसे ख़त्म हुए हमारे गुरुकुल
कॉन्वेंट स्कूलों ने किया बर्बाद
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1858 में Indian Education Act बनाया गया।
इसकी ड्राफ्टिंग ‘लोर्ड मैकोले’ ने की थी। लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत के शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी। अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W. Litnar और दूसरा था Thomas Munro, दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था। 1823 के आसपास की बात है ये Litnar , जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था,उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100 % साक्षरता है, और उस समय जब भारत में इतनी साक्षरता है
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मैकोले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी “देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था” को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह “अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था” लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे
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मैकोले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है:“कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी।”इसलिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया, जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज के तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी, फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया उनमे आग लगा दी, उसमें पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा- पीटा, जेल में डाला।
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1850 तक इस देश में ’7 लाख 32 हजार’ गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे ’7 लाख 50 हजार’, मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में ‘Higher Learning Institute’ हुआ करते थे उन सबमे 18 विषय पढाया जाता था और ये गुरुकुल समाज के लोग मिल के चलाते थे न कि राजा,महाराजा,और इन गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी।
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इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था, इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं और मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमें वो लिखता है कि:
“इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।”
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उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा, अरे हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा।
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लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे,ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी। संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है।
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जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी।



भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
मो. 0917891529862

पेट की बीमारियों के घरेलू उपचार

पेट की बीमारियों के घरेलू उपचार
पेट में अम्लता (एसिडिटी/Acidity) व गैस (Gas formation in stomach) - एक लौंग और एक इलायची प्रत्येक भोजन व नाश्ता के बाद लें लेने पर कभी भी एसिडिटी व गैस नहीं होती ।
पेट की गैस (gas formation in stomach) - पेट की गैस की बीमारी यदि पुरानी न हो तो निम्नलिखित पेट की गैस-निवारक चटनी के सेवन से लाभ प्राप्त किया जा सकता है -
1. मुनक्का (बीज निकालकर) 30 ग्राम, 2. अदरक-6 ग्राम, 3. सौंफ बड़ी-6 ग्राम, 4. काली मिर्च-3 ग्राम, 5. सेंधा नमक - 3 ग्राम (या स्वादानुसार) ।
इन पांचों वस्तुओं को थोड़े पानी में पीसकर चटनी बना लें। इसे दोनों समय भोजन के समय रोटी या भात के साथ आवश्यकतानुसार 1-2 चम्मच चटनी की भांति चाटें । आपको पेट की गैस और पेट खराबी में आराम मिलेगा ।
गैस की पीड़ा से छुटकारा दिलाने वाला गैसहर चूर्ण (gas relief mixture) - छोटी हरड़ (बाल हर्र) एक किलो इन्हें साफ करके दही की छाछ (मही) में फुलाइए । सुबह फुलते छाछ में डाल दीजिए । दूसरे दिन सुबह छाछ मे से निकाल कर पानी से साफ करके, छाया में कपड़े पर डाल कर सुखा लीजिये। जब सूख जाएं तब पुन: छाछ में डालिये | छाछ में डालकर सुखाने में 'मही की भावना' देना कहते हैं | इस प्रकार इन हर्रों को मही की 3-4-6 (छ: तक) भावनाएं दीजिये | भावना देने के बाद, सूख जाने पर, इन्हें महीन पीस लीजिये | बारीक चलनी से छान लीजिये |
इस प्रकार बनाये गए एक किलो छोटी हरड़ के चूर्ण में पाव किलो अजवाइन पीस कर मिला लीजिये । फिर इस चूर्ण में काला नमक रुचि अनुसार मिला लीजिये । बस उत्तम गैसहर चूर्ण तैयार है ।
सेवन विधि - भोजन के बाद सेहत के अनुसार, यह चूर्ण गुनगुने पानी से लें । (ठंडा पानी से भी ले सकते है) इसके सेवन से - 1. गैस की तकलीफ कभी नहीं होगी । 2. तकलीफ होने पर 5-6 मिनिट मे आराम होता है । 3. पाचन शक्ति भी बढ़ती है । दस्त साफ होते हैं । गैस का दर्द दूर करने के लिये यह अचूक, शर्तिया दवा है ।
चूर्ण बनाने की दूसरी विधि - इन हर्रों को रेत में भूंज लीजिये । खूब फूलती है । इन्हें पीस लीजिये । जल्दी पिस जाते है ।
तीसरी विधि - इस चूर्ण में 60 ग्राम सनाय (सोनामुखी) की पत्ती को हलका भुनकर चूर्ण बनाकर डालने से पुराने से पुराना बध्दकोष्ट (कब्ज) भी हफते भर में ठीक हो जाता है । सनाय की पत्ती, बिना भून का डालने से, पेट में भरोड़ आती है ।


भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
मो. 0917891529862
भारत  पूरी दुनिया में ऐसी जगह है, जहां के लोग कड़कड़ाती ठंड, बरसात और चिलचिलाती गर्मी का आनंद उठाते हैं. भारत वो देश है जहां नदियां, समंदर, पहाड़ियां, घाटियां, समतल मैदान और रेगिस्तान के साथ-साथ ऐसा सब-कुछ है जिस पर भारतीय को गर्व है. न सिर्फ़ नजारे बल्कि कुछ ऐसे अद्भुत जानवर भी जिन्हें आप भारत के अलावा कहीं और नहीं पा सकते, जिन्हें देखने के लिए दुनिया भर से सैलानी भारत आते हैं और मंत्रमुग्ध होकर वापस जाते हैं.



भमावत 
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शनिवार, 12 सितंबर 2015

मुख्य द्वार की सही दिशा

इन्कमटैक्स वालों को एक वर्ष का हिसाब देनेमें इतनी घबराहट होती है
तो ईश्वरको सारे जीवनका हिसाब देते समय क्या दशा होगी l
सोचो !

भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
मो. 0917891529862
स्टेशन से एक 18-19 वर्षीय खूबसूरत लड़की चढ़ी जिसका मेरे सामनेवाली बर्थ पर रिजर्वेशन था उसके पापा उसे छोड़ने आये थे।
अपनी सीट पर वैठ जाने के बाद उसने अपने पिता से कहा “डैडी आप जाइये अब, ट्रेन तो दस मिनट खड़ी रहेगी यहाँ दस मिनट का स्टॉपेज है।
“उसके पिता ने उदासी भरे शब्दों के साथ कहा “कोई बात नहीं बेटा, 10 मिनट और तेरे साथ बिता लूँगा, अब तो तुम्हारे क्लासेज सुरु हो रहे है काफी दिन बाद आओगी तुम।
“लड़की शायद दिल्ली में अध्ययन कर रही होगी क्योंकि उम्र और वेशभूषा से विवाहित नहीं लग रही थी ।
ट्रेन चलने लगी तो उसने खिड़की से बाहर प्लेटफार्म पर खड़े पिता को हाथ हिलाकर बाय कहा। “बायडैडी…. अरे ये क्या हुआ आपको! अरे नहीं प्लीज”पिता की आँखों में आंसू थे।
ट्रेन अपनी रफ्तार पकडती जा रही थी और पिता रुमाल से आंसू पोंछते हुए स्टेशन से बाहर जा रहे थे।
लड़की ने फोन लगाया.. “हेलो मम्मी..ये क्या है यार! जैसे ही ट्रेन स्टार्ट हुई डैडी तो रोने लग गये.. अब मैं नेक्स्ट टाइम कभी भी उनको सी-ऑफ के लिए नहीं कहूँगी. भले अकेली आ जाउंगी ऑटो से..
अच्छा बाय..पहुँचते ही कॉल करुँगी.
डैडी का खयाल रखना ओके।
”मैं कुछ देर तक लड़की को सिर्फ इस आशा सेदेखता रहा कि पारदर्शी चश्मे से झांकती उन आँखों से मुझे अश्रुधारा दिख जाए पर मुझे निराशा ही हाथ लगी. उन आँखों में नमी भी नहीं थी।
कुछ देर बाद लड़की ने फिर किसी को फोन लगाया- “हेलोजानू कैसे हो…. मैं ट्रेन में बैठ गई हूँ..
हाँ अभी चली है यहाँ से,कल अर्ली-मोर्निंग दिल्ली पहुँच जाउंगी..
लेने आ जाना. लव यूटू यार, मैंने भी बहुत मिसकिया तुम्हे..
बस कुछ घंटे और सब्र करलो कल तो पहुँच ही जाऊँगी।”
मैं मानता हूँकि आज के युगमें बच्चों को उच्चशिक्षा हेतु बाहर भेजना आवश्यक है पर इस बात में भी कोई दो राय नहीं कि इसके कई दुष्परिणाम भी हैं।
मैं यह नहीं कह रहा कि बाहर पढने वाले सारे लड़के लड़कियां ऐंसे होते हैं

भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
मो. 0917891529862

किसी विदेशी महिला और उससे पैदा होने वाले बच्चे के हाथों में कभी सत्ता नहीं देनी चाहिए :

चाणक्य : किसी विदेशी महिला और उससे पैदा होने वाले बच्चे के हाथों में कभी सत्ता नहीं देनी चाहिए :-
कारण पढ़िए :--
जब यूनानी आक्रमणकारी सेल्यूकस चन्द्रगुप्त मौर्य से हार गया और उसकी सेना बंदी बना ली गयी तब उसने अपनी खूबसूरत बेटी हेलेना के विवाह का प्रस्ताव चन्द्रगुप्त मोर्य के पास भेजा.
सेल्यूकस की सबसे छोटी बेटी हेलेन बेहद खुबसूरत थी, उसका विवाह आचार्य चाणक्य ने प्रस्ताव मिलने पर सम्राट चन्द्रगुप्त से कराया पर उन्होने विवाह से पहले हेलेन और चन्द्रगुप्त से कुछ शर्तें रखीं ; जिसके बाद ही उन दोनों का विवाह हुआ,
1. पहली शर्त यह थी की उन दोनों से उत्पन्न संतान उनके राज्य की उत्तराधिकारी नहीँ होगी, और इसका कारण बताया कि हेलेन एक विदेशी महिला है, और उसका भारत के पूर्वजों से उसका नाता नहीँ है, भारतीय संस्कृति से हेलेन पूर्णतः अनभिग्य है.
2. दूसरा कारण बताया कि हेलेन विदेशी शत्रुओं की बेटी है, उसकी निष्ठा कभी भारत के साथ नहीं हो सकती.
3. तीसरा कारण बताया कि हेलेन का बेटा विदेशी माँ का पुत्र होने के नाते उसके प्रभाव से कभी मुक्त नहीँ हो पायेगा और भारतीय माटी, भारतीय लोगों के प्रति पूर्ण निष्ठावान नहीं हो पायेगा.
4. एक और शर्त चाणक्य ने हेलेन के सामने रखी कि वह कभी भी चन्द्रगुप्त के राज्य कार्य में हस्तक्षेप नहीँ करेगी और राजनीति और प्रशासनिक अधिकार से पूर्णतया विरत रहेगी; परंतु गृहस्थ जीवन में हेलेन का पूर्ण अधिकार होगा.

भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
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