रविवार, 27 सितंबर 2015

अनेक सनातन धर्मावलम्बी सोमरस को अल्कोहल समझते है जब की वेदों में वर्णित सोमरस अल्कोहल नहीं है सोमरस को अल्कोहल कहने वाले महामूर्ख है ऋग्वेद के प्रथम मंडल के सूक्त 135 की ऋचा 1499 में स्पष्ट वर्णन है की सोमरस एक औषधि है जिसे पर्वतो से प्राप्त किया जाता था एवम् इसमें गऊ का दुग्ध जौ अदि मिला कर देवताओ को अर्पित किया जाता था अब आप ही बताये की दुनिया की कौन सी अल्कोहल पर्वतो से प्राप्त होती है और कौन सी अल्कोहल में गऊ का दुग्ध ,जौ ,दही अदि मिलाकर पिया जाता है अतः स्पस्ट है कि सोमरस एक औषधीय पेय है न की अल्कोहल ।


भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
मो. 0917891529862

प्राचीन हिन्दू परम्पराएं और उनसे जुड़े फायद

14 प्राचीन हिन्दू परम्पराएं और उनसे जुड़े फायद
पुराने समय से बहुत सी परंपराएं प्रचलित हैं, जिनका पालन आज भी काफी लोग कर रहे हैं। ये परंपराएं धर्म से जुड़ी दिखाई देती हैं, लेकिन इनके वैज्ञानिक कारण भी हैं। जो लोग इन परंपराओं को अपने जीवन में उतारते हैं, वे स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों से बचे रहते हैं। यहां जानिए ऐसी ही 14 खास परंपराएं, जिनका पालन अधिकतर परिवारों में किया जाता है…
1. एक ही गोत्र में शादी नहीं करना
Ancient Hindu Traditions & Benefits
कई शोधों में ये बात सामने आई है कि व्यक्ति को जेनेटिक बीमारी न हो इसके लिए एक इलाज है ‘सेपरेशन ऑफ़ जींस’, यानी अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नहीं करना चाहिए। रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नहीं हो पाते हैं और जींस से संबंधित बीमारियां जैसे कलर ब्लाईंडनेस आदि होने की संभावनाएं रहती हैं। संभवत: पुराने समय में ही जींस और डीएनए के बारे खोज कर ली गई थी और इसी कारण एक गोत्र में विवाह न करने की परंपरा बनाई गई।
2. चूड़ियों का महत्व
पुराने समय मे ज्यादातर महिलाये सोने-चांदी की चूड़ियाँ पहना करती थी माना जाता है की सोने-चांदी के घर्षण से शरीर को इनके शक्तिशाली तत्व प्राप्त होते हैं, जिससे महिलाओं को स्वास्थ्य लाभ मिलता है। महिलाये पुरुषों से कमजोर होती है | चूड़ियाँ उनके हाथो को मजबूत और शक्तिशाली बनती है
3. सिंदूर लगाना
Sindur Khela During Hindu Festival Durga Puja
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सिंदूर हल्दी, नींबू और पारा के मिश्रण से तैयार किया जाता है। सिंदूर महिला के रक्तचाप को नियंत्रित करने के अलावा उनकी सेक्सुअल ड्राइव को भी बढाता है। इसे उस जगह पर लगाया जाता है , जहां पर पिट्यूटरी ग्रंथि होती है, जहां पर सारे हार्मोन डेवलप होते हैं। इसके अलावा सिंदूर तनाव से भी महिलाओं को दूर रखता है।
4. बच्चों का कान छेदन
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विज्ञान कहता है कि कर्णभेद से मस्तिष्क में रक्त का संचार समुचित प्रकार से होता है। इससे बौद्घिक योग्यता बढ़ती है। और बच्चो के चेहरे पर चमक आती है | इसके कारण बच्चा बेहतर ज्ञान प्राप्त कर लेता है
5 पाव छूना और ज़मीन पर बैठ कर भोजन करना
Langar
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बड़ो ले चरण स्पर्श करने से रक्त पवाह सर की तरफ होता है और इस तरह से चरणर्-स्पश करने से अपने से बड़ों की विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा शक्ति हमारे शरीर को नयी ऊर्जा प्रदान कर ऊर्जावान, निरोगी और सकारात्मक विचारों से परिपूर्ण कर देती है। सुखासन से पूरे शरीर में रक्त-संचार समान रूप से होने लगता है। जिससे शरीर अधिक ऊर्जावान हो जाता है।तथा पृथ्वी की ऊर्जा भी भोजन के साथ हमतक पहुचती है।
6. हाथों में मेहंदी लगाना
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विज्ञान कहता है की मेंहदी बहुत ठंडी होती है इस लगाने से दिमाग ठंडा रहता है और तनाव भी कम होता है इसलिये शादी के दिन दुल्‍हने मेंहदी लगाती हैं, जिससे उन्‍हें शादी का तनाव ना हो पाए।
7. सर पे चोटी रखना
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सिर पर चोंटी रखने की परंपरा को हिन्दुत्व की पहचान तक माना जाता है । असल में जिस स्थान पर शिखा यानि कि चोंटी रखने की परंपरा है, वहा पर सिर के बीचों-बीच सुषुम्ना नाड़ी का स्थान होता है।सुषुम्रा नाड़ी इंसान के हर तरह के विकास में बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चोटी सुषुम्रा नाड़ी को हानिकारक प्रभावों से बचाती है
8. भोजन के अंत में मिठाई खाना
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जब हम कुछ मसालेदार भोजन खाते हैं, तो हमारे शरीर एसिड बने लगता है जिससे हमारा खाना पचता है और यह एसिड ज्यादा ना बने इसके लिए आखिर में मिठाई खाई जाती है जो पाचन प्रक्रिया शांत करती है।
9. तुलसी के पेड़ की क्यों पूजा होती है.
Tulsi
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तुलसी में विद्यमान रसायन वस्तुतः उतने ही गुणकारी हैं, जितना वर्णन शास्रों में किया गया है। यह कीटनाशक है, कीटप्रतिकारक तथा खतरनाक जीवाणुनाशक है। विशेषकर एनांफिलिस जाति के मच्छरों के विरुद्ध इसका कीटनाशी प्रभाव उल्लेखनीय है।
10. पीपल के वृक्ष की पूजा
piple
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पीपल की उपयोगिता और महत्ता वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों कारणों से है। यह वृक्ष अन्य वृक्षों की तुलना में वातावरण में ऑक्सीजन की अधिक-से-अधिक मात्रा में अभिवृद्धि करता है। यह प्रदूषित वायु को स्वच्छ करता है और आस-पास के वातावरण में सात्विकता की वृद्धि भी करता है। इसके संसर्ग में आते ही तन-मन स्वतः हर्षित और पुलकित हो जाता है। यही कारण है कि इस वृक्ष के नीचे ध्यान एवं मंत्र जप का विशेष महत्व है।


भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
मो. 0917891529862
महाराणा प्रताप के बेटे अमर सिंह ने युद्ध में मुगल
सेनापति अब्दुल रहीम खां को परास्त कर दिया।
फिर उन्होंने मुगल सरदारों के साथ ही मुगलों के
हरम को भी कब्जे में ले लिया।
महाराणा प्रताप को जब यह समाचार
मिला तो वह रुग्णावस्था में ही युद्ध क्षेत्र में
जाकर अमर सिंह पर गरज पड़े, 'ऐसा नीच काम करने
से पहले तू मर क्यों नहीं गया! हमारी भारतीय
संस्कृति को कलंकित करते तुझे लाज न आई?
अमर सिंह पिता के सामने लज्जित खड़े रहे।
महाराणा प्रताप ने तत्काल मुगल हरम में पहुंचकर
बड़ी बेगम को प्रणाम करते हुए
कहा,'बड़ी साहिबा, जो सिर शहंशाह अकबर के
सामने नहीं झुका, वह आपके सामने झुकाता हूं।
मेरे बेटे से जो अपराध हुआ, उसे क्षमा करें। हमारे
लिए स्त्री पूजनीय है, आप
लोगों को बंदी बनाकर उसने
हमारी संस्कृति का अपमान किया है।'
उधर शहंशाह अकबर ने जब मुगल हरम की चिंता करते
हुए सेनापति अब्दुल रहीम
खां को फटकारा तो उसने बादशाह को आश्वस्त
करते हुए कहा, 'बेगम वहां उसी तरह महफूज हैं, जिस
तरह शाही महल में रहती हैं।'
इस पर अकबर ने कहा, 'पर महाराणा प्रताप से
हमारी जंग चल रही है।' इस पर सेनापति बोले,'
बादशाह सलामत, महाराणा प्रताप
हिंदुस्तानी संस्कृति के रक्षक हैं, वह बेगम को कुछ न
होने देंगे।' शहंशाह अकबर शांत तो हुए मगर
उनकी फिक्र कम न हुई।
जब दूसरे दिन राजपूत सैनिकों की कड़ी सुरक्षा में
राजकीय सम्मान के साथ
शाही बेगमों की पालकी आगरा के किले में
पहुंची तो बादशाह अकबर ने कहा,
'महाराणा प्रताप जैसा राजा इतिहास में कम
ही पैदा होता है। वे हिंदुस्तानी तहजीब के
भी सच्चे रखवाले हैं।

         जय एकलिंग जी
☆जय महाराणा प्रताप सिंह☆


भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
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गुरुवार, 17 सितंबर 2015

कलियुग तूं कैसा है??
बिल्कुल "काला- युग "जैसा है।
"भारत" कलियुग में इंडिया बन गया ।
"सदाचारी" देश अब भ्रष्टाचारी बन गया ।।
नहीं सोचा कभी ये दशा होगी हमारी ।
सदाचारी की जगह पैदा होगा बलात्कारी।।
सीता सावित्री भी तब रोई होगी।
"दामिनी" जब ऊपर गई होगी ।।
अब तो ५ वर्ष की "गुडिया" भी रोती है ।
जीवन और मौत के बारे में सोचती है।।
हमने "हनुमान- ब्रह्मचारी" की कथा पढ़ी है।
किंतु कलियुग ने तो बलात्कारी की कथा गढ़ी है।।
कलियुग के बारे में सुना था मैने लेक्चर ।
लेकिन अब तो कलियुग ने दिखा दी अपनी पिक्चर।।
लेकिन परिवर्तन संसार का नियम है जानते है हम ।
फिर से इंडिया को भारत बनायेंगे बाजुअों में है दम ।।
अब भ्रष्टाचार का नामो-निशान नहीं होगा।
विश्व का गुरु पुन: मेरा हिंदुस्तान होगा ।।

भमावत 
थूर, उदयपुर , मेवाड़
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मंगलवार, 15 सितंबर 2015

गाय प्रश्नोतरी ????

गाय प्रश्नोतरी ????
* भगवान कृष्ण ने किस ग्रंथ में कहा है ‘धेनुनामसिम’ मैं गायों में कामधेनु हूं?
- श्रीमद् भगवतगीता |
* ‘चाहे मुझे मार डालो पर गाय पर हाथ न उठाओ’ किस महापुरुष ने कहा था?
- बाल गंगाधर तिलक |
* रामचंद्र ‘बीर’ ने कितने दिनों तक गौहत्या पर रोक लगवाने के लिए अनशन किया?
-- 70 दिन |
* पंजाब में किस शासक के राज्य में गौ हत्या पर मृत्यु दंड दिया जाता था?
-- पंजाब केसरी महाराज रणजीत सिंह |
* गाय के घी से हवन पर किस देश में वैज्ञानिक प्रयोग किया गया?
-- रूस |
* गोबर गैस संयंत्र में गैस प्राप्ति के बाद बचे पदार्थ का उपयोग किस में होता है?
-- खेती के लिए जैविक (केंचुआ) खाद बनाने में |
* मनुष्य को गौ-यज्ञ का फल किस प्रकार होता है?
-- कत्लखाने जा रही गाय को छुड़ाकर उसके पालन-पोषण की व्यवस्था करने पर |
* एक तोला (10 ग्राम) गाय के घी से यज्ञ करने पर क्या बनता है?
- एक टन आँक्सीजन |
* प्रसिद् मुस्लिम संत रसखान ने क्या अभिलाषा व्यक्त की थी?
-- यदि पशु के रूप में मेरा जन्म हो तो मैं बाबा नंद की गायों के बीच में जन्म लूं |
* पं. मदन मोहन मालवीय जी की अंतिम इच्छा क्या थी?
-- भारतीय संविधान में सबसे पहली धारा सम्पूर्ण गौवंश हत्या निषेध की बने |
* भगवान शिव का प्रिय श्री सम्पन्न ‘बिल्वपत्र’ की उत्पत्ति कहा से हुई है?
-- गाय के गोबर से |
* गौवंशीय पशु अधिनियम 1995 क्या है?
-- 10 वर्ष तक का कारावास और 10,000 रुपए तक का जुर्माना |
* गाय की रीढ़ में स्थित सुर्यकेतु नाड़ी से क्या होता है?
-- सर्वरोगनाशक, सर्वविषनाशक होता है |
* देशी गाय के एक ग्राम गोबर में कम से कम कितने जीवाणु होते है?
-- 300 करोड़ |
* गाय के दूध में कौन-कौन से खनिज पाए जाते है?
-- कैलिशयम 200 प्रतिशत, फास्फोरस 150 प्रतिशत, लौह 20 प्रतिशत, गंधक 50 प्रतिशत, पोटाशियम 50 प्रतिशत, सोडियम 10 प्रतिशत, पाए जाते है |
* ‘गौ सर्वदेवमयी और वेद सर्वगौमय है’, यह युक्ति किस पुराण की है?
-- स्कन्द पुराण |
* विश्व की सबसे बड़ी गौशाला का नाम बताइए?
-- पथमेड़ा, राजस्थान |
* गाय के दूध में कौन-कौन से विटामिन पाए जाते है?
-- विटामिन C 2 प्रतिशत, विटामिन A (आई.क्यू) 174 और विटामिन D 5 प्रतिशत |
* यदि हम गायों की रक्षा करेंगे तो गाय हमारी रक्षा करेंगी ‘यह संदेश किस महापरुष का है?
-- पंडित मदन मोहन मालवीय का |
* ‘गौ’ धर्म, अर्थ, काम और
मोक्ष की धात्री होने के कारण कामधेनु है| इसका अनिष्ट चिंतन ही पराभव का कारण है| यह विचार किनका था?
-- महर्षि अरविंद का |
* भगवान बालकृष्ण ने गायें चराने का कार्य किस दिन से प्रारम्भ किया था?
-- गोपाष्टमी से |
* श्री राम ने वन गमन से पूर्व किस ब्राह्मण को गायें दान की थी?
-- त्रिजट ब्राह्मण को |
* ‘जो पशु हां तों कहा बसु मेरो, चरों चित नंद की धेनु मंझारन’ यह अभिलाषा किस मुस्लिम कवि की है?
-- रसखान |
* ‘यही देहु आज्ञा तुरुक को खापाऊं, गौ माता का दुःख सदा मैं मिटआऊँ‘ यह इच्छा किस गुरु ने प्रकट की?
- गुरु गोबिंद सिंह जी ने |

जय गौ माँ

भमावत 
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चलता रहा हुं अग्निपथ पर...चलता चला जाऊँगा...
हिन्दू बन कर जन्म लिया मैंने...हिन्दू बन कर ही मर जाऊंगा.
श्री राम की संतान हूँ...रुकना मैंने सीखा नहीं...
महाकाल का भक्त हूँ...झुकना मैंने सीखा नही...
ह्रदय में जो धड़क रहा है...वो धड़कन तेरे नाम का...
रगो में जो बह रहा है...वो लहू है श्री राम का.....
  ॥ जय श्री  ॥

भमावत 
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भूत-प्रेतो को निमंत्रण देता है घर के फ्रिज में रखा हुआ आटा ।

भूत-प्रेतो को निमंत्रण देता है घर के
फ्रिज में रखा हुआ आटा ।
वर्तमान में बहुत सी गृहिणियां खाना
बनाते समय रात को बचा हुआ अतिरिक्त
आटा गोल लोई बनाकर उसे फ्रिज में रख
देती है और उसका प्रयोग अगले दिन करती
है। कई बार सुबह के समय भी आटा बचने पर
ऎसा ही किया जाता है। धर्मशास्त्रों
के अनुसार गूंथा हुआ आटा पिण्ड माना
जाता है जिसे मृतात्मा के भक्षण के
लिए अर्पित किया जाता है।
जिन भी घरों में लगातार या अक्सर
गूंथा हुआ आटा फ्रिज में रखने की
परंपरा बन जाती है वहां पर भूत, प्रेत
तथा अन्य ऊपरी हवाएं भोजन करने के लिए
आने लग जाती है। इनमें अधिकतर वे
आत्माएं होती है जिन्हें उनके
घरवालों ने भुला दिया या जिनकी अब
तक मुक्ति नहीं हो सकी है। ऎसी
आत्माओं के घर में आने के साथ ही घर
में अनेकों समस्याएं भी आनी शुरू हो
जाती हैं।
बचे हुए आटे को इस तरह रखने वाले सभी
घरों में किसी न किसी प्रकार के
अनिष्ट देखने को मिलते हैं। वहां
अक्सर बीमारियां, क्रोध, आलस आदि बने
रहते हैं और घर में रहने वालों की भी
तरक्की नहीं हो पाती है।
शास्त्रों के अनुसार ऎसे किसी भी
चीज को घर में स्थान नहीं देना चाहिए
जो मृतात्माओं का भोजन हो अथवा
उन्हें किसी भी प्रकार से आमंत्रित
करने की क्षमता रखती हो। इसके ही रात
के बासी बचे आटे से रोटी बनाना शरीर
के लिए भी नुकसानदेह होता है। ऎसा
भोजन तामसिकता को तो बढ़ावा देता
ही है साथ में शरीर को भी रोगों का घर
बना देता है जबकि ताजा बना भोजन शरीर
को स्फूर्ति, शक्ति और स्वास्थ्य
देता है। इन सभी चीजों को देखते हुए
हमें घर में बासी आटा नही रखना चहिये ।

भमावत 
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